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آسی غازیپوری

1834 - 1917 | اتر پردیش, بھارت

آسی غازیپوری

دوہا 5

ओस ओस सब कोई कहे, आंसू कहै कोय।

मोहि विरहिन के सोग मे, रैन रही है रोय।।

  • شیئر کیجیے

कर कम्पे लिखनी डिगे, अंग अंग थहराय।

सुधि आवत छाती फटे, पांती लिखी जाय।।

  • شیئر کیجیے

भुज फरकत तोरे मिलन को, स्रवन सुनन को बैन।

मन माला तोहि नाम का, जपत रहत दिन रैन।।

  • شیئر کیجیے

मै चाहूं कि उड़ चलूं, पर बिन उड़ा जाय।

काह कहौं करतार को, (जो) पर ना दिया लगाय।।

  • شیئر کیجیے

मन मा राखूं मन जरे, कहूं तो मुख जरि जाय।

गूंगे का सपना भयो, समझ समझ पछताय।।

  • شیئر کیجیے

غزل 25

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