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شیخ شرف الدین یحییٰ منیرنی

1262 - 1380

شیخ شرف الدین یحییٰ منیرنی

دوہا 4

काला हंसा निरमला, बसे समंदर तीर।

पंख पसारे बिख हरे, निरमल करे सरीर।।

  • شیئر کیجیے

वाट भली पर साँकरी, नगर भला पर दूर।

नन्ह भला पर पातला, नारी कर हर चूर।।

  • شیئر کیجیے

शर्फ सिर्फ मायल करे, दर्द कछू बसाय।

गर्द छुए दरबार की, सो दर्द दूर हो जाय।।

  • شیئر کیجیے

साँकर कुएँ पताल पानी, लाखन बूँद बिकाय।

बजर परो तँह मथुरा नगरी, कान्ह पियासा जाय।।

  • شیئر کیجیے

مکتوب 31

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