शेख़ फ़रीदुद्दीन अत्तार के परिचय
बकौल मौलाना रूमी - मंसूर हल्लाज को सूली पर चढाने के डेढ़ सौ साल बाद फिर से मंसूर का आध्यात्मिक प्रकाश शेख़ फ़रीदुद्दीन अत्तार के रूप में प्रकाशित हुआ है | अत्तार अपने जीवन के शुरूआती दौर में औषधियां और इत्र बेचा करते थे | एक दिन दुकान पर एक दरवेश की आमद हुई, अत्तार पर उसकी बातों का कुछ ऐसा प्रभाव पड़ा की उसी दिन उन्होंने अपनी दुकान उठा दी और दरवेशी ख़िर्क़ा पहन लिया| जाते समय इनकी मुलाक़ात मौलाना रूमी से भी हुई थी | अत्तार ने क़रीब 114 किताबें लिखी, जिनमे से क़रीब 30 ही मिल पायी हैं | अपने आज़ाद और खुले विचारों के कारण इन्हें काफ़ी दिक्कतों का सामना भी करना पड़ा| इनका मकान लूट कर इन्हें बाहर निकाल दिया गया| कुछ किवदंतियों के मुताबिक़ चंगेज़ खान की सेना के हाथों इनकी मृत्यु हुई|
प्रमुख रचनाएं -
१. पंद नामा (ये नाम सही है?)
२. तज़किरात उल औलिया
३. मंतिक उत तैर
४ . क़सीदा
५. मुसीबत नामा
६. बुलबुल नामा
७. शुतुर नामा