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Sufinama
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रसखान

रसखान के दोहे

कहा करै 'रसखानि' को कोऊ चुगुल लबार

जो पै राखनहार है माखन चाखनहार

bachcha bolā dekh kar masjid ālī-shān

allāh tere ek ko itnā baḌā makān

bachcha bolā dekh kar masjid ālī-shān

allāh tere ek ko itnā baḌā makān

जोहन नन्दकुमार को गई नंद के गेह

मोहिं देखे मुस्काइ कै बरस्यो मेह सनेह

मुस्कान माधुरी - सजनी लोनो लला लखै नंद के गेह

चितयौ मृदु मुस्काइ कै हरी सबै सुधि देह

भक्ति-भावना - सरस नेह लवलीन वन द्वै सुजान 'रसखानि'

ताके आस बिसास सो पगे प्रान 'रसखानि'

भक्ति-भावना - बिमल सरल 'रसखानि' भई सकल 'रसखानि'

सोई नाव 'रसखानि' को चित चातक 'रसखानि'

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