रहीम के परिचय
मुगल सरदार बैरम ख़ान ख़ान-ए-खाना (अकबर के संरक्षक) के पुत्र। अकबर के समय में सेनानायक और मंत्री रहे। विद्या-व्यसनी और उच्च कोटि के कवि थे। संस्कृत, अरबी, फ़ारसी भाषाओं का भी गहरा ज्ञान था। अकबर के शासन-काल में इनकी दानवीरता प्रसिद्ध थी। जहाँगीर के वक़्त युद्ध में धोखा देने का आरोप लगा और बंदी भी बनाए गये। इनके काव्य ग्रंथों में- रहीम दोहावली, सतसई, बरवै, नायिका भेद, श्रृंगार-सोरठ, मदनाष्टक और रास पंचाध्यायी प्रसिद्ध है। रहीम का ब्रज और अवधी दोनों पर सामान अधिकार था। कहते हैं कि तुलसी ने रहीम के कहने पर ही उनके बरवै नायिका भेद को देखकर ही अपना बरवै रामायण लिखा।