हज़रत सुल्तान बाहू के परिचय
क़ादरिया संप्रदाय के थे। औरंगज़ेब इनका सम्मान करता था, लेकिन इन्होंने उसकी ओर कभी ध्यान नहीं दिया। तवारीख़ सुल्तान बाहू के अनुसार इन्होंने 140 ग्रंथ अरबी और फ़ारसी भाषाओं में लिखे। इसके अतिरिक्त उन्होंने पंजाबी में भी रचनाएं की। इनकी काफ़ियाँ देश भर में क़व्वालों द्वारा गायी जाती है। सिहर्फ़ी नाम का लिखित ग्रंथ प्राप्त होता है।