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Sufinama

Haidar dehalvi के अशआर

कर इबादत पच्छोतासें उमराँ चार दिहाड़े हू

थी सौदागर कर लै सौदा जाँ तक हट्ट ताड़े हू

मुँह दिखलावे और छपे, छल-बल है जगदीस

पास रहे हर मिले इस को बिसवे बीस

सेवक सेवा में रहै अनत कहूँ नहिं जाय

दुख सुख सिर ऊपर सहै कह 'कबीर' समुझाय

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