बाबा किनाराम की साखी
अनुभव सोई जानिये, जो नित रहै बिचार।
राम किना सत शब्द गहि, उतर जाय भौपार।।
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चाह चमारी चहड़ी, सब नीचन ते नीच।
तूं तो पूरन ब्रह्म था, चाहन होती बीच।।
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