संपूर्ण
दोहा9
ग़ज़ल1
कलाम24
ई-पुस्तक3
ऑडियो 2
वीडियो116
चित्र शायरी 2
परिचय
अन्य
पहेली25
फ़ारसी कलाम21
क़िस्सा1
निस्बत22
कह मुकरनी14
ढकोसला6
दो सुखना32
ख़ालिक़ बारी1
CONTENT3
अमीर ख़ुसरौ
दोहा 9
ग़ज़ल 1
कलाम 24
पहेली 25
फ़ारसी कलाम 21
क़िस्सा 1
निस्बत 22
चित्र शायरी 2
हाथ जोड़ मैं खड़ा हुआ हूँ, शरण आपकी पड़ा हुआ हूँ सभी तरह से झड़ा हुआ हूँ, नहीं बनता है कुछ काम मैं मतिमन्द मूढ अज्ञानी, गति आपकी जाये ना जानी सुन लो मेरी राम कहानी, तुम्हारे बिन सरता ना काम माया मोह मनहिं भरमावें, कामदेव बस में ना आवे बिना तुम्हारे कौन बचावे, बिसरो मत अवचल राम दुनिया दौलत तुम हो सारी, तुम हो मेरे मूल पसारी दया करो प्रभु दीन हितकारी, सुध लो मेरी आठों याम प्रेमरूप में तुम ही आये, स्वामी अवगतदास कहाये अचलदास को शरण निभाओ, दो प्रभु अपना नाम
आज रंग है ऐ महा-रंग है री आज रंग है ऐ महा-रंग है री मेरे महबूब के घर रंग है री मोहे पीर पायो निजामुद्दीन औलिया निजामुद्दीन औलिया अलाउद्दीन औलिया अलाउद्दीन औलिया फरीदुद्दीन औलिया फरीदुद्दीन औलिया कुत्बुद्दीन औलिया कुत्बुद्दीन औलिया मोइनुद्दीन औलिया मुइनुद्दीन औलिया मुहिउद्दीन औलिया आ मुहिउद्दीन औलिया मुहिउद्दीन औलिया वो तो जहाँ देखो मोरे संग है री अरे ऐ री सखी री वो तो जहाँ देखो मोरो बर संग है री मोहे पीर पायो निजामुद्दीन औलिया आहे आहे आहे वा मुँह माँगे बर संग है री वो तो मुँह माँगे बर संग है री निजामुद्दीन औलिया जग उजियारो जग उजियारो जगत उजियारो। वो तो मुँह माँगे बर संग है री मैं पीर पायो निजामुद्दीन औलिया 'गंज-शकर' मोरे संग है री मैं तो ऐसो रंग और नहीं देखियो सखी री मैं तो ऐसी रंग देस-बिदेस में ढूँड फिरी हूँ देस-बिदेस में आहे आहे आहे वा ऐ गोरा रंग मन भायो निजामुद्दीन मुँह माँगे बर संग है री सजन मिलावरा इस आँगन मा सजन सजन तन सजन मिलाव रा इस आँगन में उस आँगन में अरे इस आँगन में वो तो उस आँगन में अरे वो तो जहाँ देखो मोरे संग है री आज रंग है ऐ महा-रंग है री ऐ तोरा रंग मन भायो निजामुद्दीन मैं तो तोरा रंग मन भायो निजामुद्दीन मुँह माँगे बर संग है री मैं तो ऐसो रंग और नहीं देखी सखी री ऐ महबूब-ए-इलाही मैं तो ऐसो रंग और नहीं देखी देस-बिदेस में ढूँड फिरी हुँ आज रंग है ऐ महा-रंग है री मेरे महबूब के घर रंग है री