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अमीर ख़ुसरौ के परिचय
मूल नाम : अबुल हसन यमीनुद्दीन
संबंधी : अहमद (Brother), अचलदास (Brother), अफ़सोस (मुरीद), आसी गाज़ीपुरी (Brother)
पूरा नाम अबुल हसन यमीन-उद्दीन अमीर ख़ुसरो। उर्दू- हिन्दवी के पहले शाइर| प्रसिद्ध चिश्ती संत हज़रत निजामुद्दीन औलिया के शागिर्द । फ़ारसी, संस्कृत, उर्दू, हिन्दवी और कई भारतीय प्रांतीय भाषाओँ पर भी अधिकार था । संगीत के मर्मज्ञ और कई रागों तथा साज़ों जैसे तबला और सितार का अविष्कार किया । क़व्वाली इनके समय में ही आम हुई और सूफ़ी महफ़िलों में इसका चलन शुरू हुआ । कई हिन्दवी गीत लिखे जो आज भी जन-मानस में प्रचलित हैं । शाइरी के साथ साथ इन्होने पहेलियाँ, कहमुकरनियां, ढकोसले आदि भी कहे जो खूब प्रचलित हुए । अपने गुरु की मृत्यु का शोक बर्दाश्त न कर पाने के कारण ६ महीने बाद ही मृत्यु को प्राप्त हुए ।
प्रमुख रचनायें -
१. तुहफ़तुल सिग़र
२.वस्तुल हयात
३. मतला उल अनवार
४ .तुग़लक़ नामा
५ . निहायतुल कमाल
७. गुर्रतुल कमाल
८. ख़ज़ानातुल फु़तुह
९.मिफ़्ताह उल फु़तुह
१०.नूह सिपहर
११. ख़ालिक़-बारी
१२.मसनवी देवल रानी ख़िज़्र ख़ान
१३.बक़िया नक़िया
१४.मसनवी क़िरानउससा'दैन
१५ .शीरीं खु़सरो
१६ .मजनू ओ लैला
१७.आईना ए सिकन्दरी
१८ .हश्त बिहिश्त
१९ .एजाज़ ए खु़सरवी
२० अफ़ज़ल उल फ़वायद
महत्वपूर्ण आलोचनात्मक विचार
Rekhta websiteA widely respected poet, Faraz received several awards. Some of these include Adamji Award, Abaseen Award, Kamal-e-Fun Award, and Hilal-e-Imtiyaz award, which he returned registering his displeasure with the country’s governance. He was decorated with Hilal-e-Pakistan award by the Government of Pakistan posthumously.
स्रोत : REKHTA WEBSITE
