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Sufinama
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احمد

1603 - 1639

احمد

دوہا 14

अंजलि समुद उलीचिते, नख सों कटे सुमेर।

काहू हाथ आवई, काल करम को फेर।।

  • شیئر کیجیے

'अहमद' नग नहि खोलिये या कलि खोटे हाट।

चुपकि मुटरियां बांधिये, गहिये अपनी बाट।।

  • شیئر کیجیے

'अहमद' या मन सदन में, हरि आवे केहि वाट।

बिकट जुरे जौ लौ निपट, खुले कपट कपाट।।

  • شیئر کیجیے

कहा करौं बैकुण्ठ लै, कल्प वृक्ष की छाँह।

'अहमद' ढांक सुहावने, जहं प्रीतम गलबाँह।।

  • شیئر کیجیے

प्रीतम नहीं बजार में, वहै बजार उजार।

प्रीतम मिलै उजार में, वहै उजार बजार।।

  • شیئر کیجیے

سورٹھا 2

 

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