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अबू अली दक़्क़ाक़

- 1015 | निशापुर, ईरान

अबू अली दक़्क़ाक़

सूफ़ी उद्धरण 42

इबादत से ज़्यादा बुलंद मर्तबा किसी चीज़ का नहीं और इंसान के लिए बंदा होने से बेहतर कोई ओहदा नहीं।

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जो शख़्स बादशाहों का साथ और ना-मुनासिब तौर-तरीक़े इख़्तियार करे, वो अपनी इसी हिमाक़त के चलते मारा जाएगा।

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जो शख़्स हक़ बात कह कर चुप रहे, वो गूँगा शैतान है।

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मुहब्बत मिठास है, लेकिन वो अस्ल में एक हैरत है। सच्चा इश्क़, तमाम हदों से आगे निकल जाता है।

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लोगों में रह कर वही पहनो, जो वे पहनते हैं और वही खाओ, जो वे खाते हैं। लेकिन दिल में उन से अलग रास्ता अपनाओ।

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