असली नाम वली मोहम्मद। बाँके शायर। जितने संजीदा, उतने ही चुलबुले। उन्होंने दुनिया को बिल्कुल अलग निगाहों से देखा और उर्दू शाइरी को नए विषय और नई भाषा दी। दिल्ली में पैदा हुए। मगर आगार में ज़िंदगी गुजारी। कलंदरी की तरह जिए और दरवेशों जैसी मौत पायी। अपनी नज़मों के लिए मशहूर, मगर गज़ल भी बला के तेवरों वाली कही।