खिरद मन्द अली शाहपुर के लाला श्री राम के आश्रित थे। इन्होंने हिजरी सन् 1206 में मनामल दीनी नामक पुस्तक लिखी जिसमें कुरान कुछ आयतों का हिंदी में अनुवाद किया जिसकी नकल कुदरत अली ने हिजरी सन् 1253 में की। पुस्तक में कुल 48 आयतों का हिंदी अनुवाद है। अन्त में कुछ आयतों की विस्तृत व्याख्या भी पौराणिक ढंग पर की है।