'गुलाल साहब बुल्ला साहब के शिष्य थे। शिष्यत्व ग्रहण करने से पूर्व गाजीपुर में जमींदार थे। इनके बारे में ज़्यादा जानकारी प्राप्त नहीं हो होती। इनकी रचनाओं के दो प्रमुख स्रोत हैं- (1) मुड़कुड़ा की गद्दी से प्रकाशित 'महात्माओं की वाणी एवं बेलवेडियर प्रेस प्रकाशित गुलाल साहब की वाणी।'