अगर इल्म ख़ुदा की रज़ा के लिए पढ़ा जाए तो उस से बढ़कर और कोई नेकी नहीं, मगर अक्सर लोग रज़ा-ए-हक़ के लिए इल्म नहीं पढ़ते बल्कि दुनिया के शिकार के लिए जाल बनाते हैं।
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अगर सारी दुनिया मुझ पर हलाल कर दें तो मैं उस से उसी क़द्र शर्म करूँ जिस क़द्र कि तुम मुर्दार से करते हो।
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अस्ल तवक्कुल यह है कि आदमी ख़ुदा के सिवा किसी से उम्मीद न रखे।
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ज़्यादा खाना-ज़्यादा सोना दिल को फ़ासिद करता है।
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हुकूमत की ज़िम्मेदारी को ऐश-ओ-तरब का ज़रिया नहीं बनाना चाहिए।
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