बेदार, मीर दर्द और मीर तकी मीर की दिल्ली के थे। मीर दर्द के शागिर्द थे और उन्हीं की तरह दुखे हुए दिल की शाइरी करते थे। वो बाक़ायदा सूफ़ी थे। उनके पीर ने आगरा जाने को कहा तो आगरा पहुंच कर शेख़ सलीम चिश्ती की दरगाह पर पड़ रहे और वहीं दम तोड़ा। उनके मज़ार पर उर्स हुआ करता था।