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अली हैदर मुल्तानी

1690 - 1785 | काज़िया, पाकिस्तान

अली हैदर मुल्तानी के परिचय

इनका पूरा जीवनकाल अपने शहर काज़िया में ही गुजरा और यहीं इन्होंने आखिरी सांस ली। इनकी कविताएं जनमानस में खूब लोकप्रिय हैं और भ्रमणशील फकीरों द्वारा गाए जाते हैं। 1898 में लाहौर के एक व्यक्ति मलिक फ़ज़लुद्दीन ने इनकी कविताओं से प्रभावित होकर उन्हें छपवाया। इस किताब में इनकी ज्यादातर कव्वालियों का संग्रह किया, जिन्हें अली हैदर साहब के ही एक मुरीद हजरत फकीर गुलाम की देख रेख में मूल पांडुलिपि की मद्द से छपवाया गया। इस किताब का नाम मुकम्मल मज्मुआ आवयात-ए-अली हैदर रखा गया।

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