अब्दुर्रहमान के दोहे
करकी करकी चूरिया बरकी बरकी रीति।
दरकी दरकी कंचुकी हटकी हटकी प्रीति।।
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नर राची मेंना लखी तू कित लिख्यो सुजान।
पढ़ कुरान भौरा भयो सुन राच्यो रहमान।।
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बानी बानी देत शुभ जस बाती तस रीति।
रहैमान ताको तबै रहैमान चित प्रीति।।
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बारी बारी बैस में वारी सौति श्रृंगार।
हारी हारी करत है हारी हेरत हार।।
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चुनी चुनी पहिरी सुरँग चुनी सौति दल कीन।
बनी बनी रस सो सरस तना तनी कुच पीन।।
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पलकन में राखौ पियहि पलकन छाड़ौ संग।
पुतरी सो तै होहि जिन डरपत अपने अंग।।
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