सलाम
यह एक विधा है जिसमे पीर,पैग़म्बर और बुजुर्गों पर सलाम भेजा जाता है। यह एक दुआ होती है। सलाम का अर्थ सलामती है।सलाम एक दुआ है कि सब सूफ़ी सुख और अमन बाटें।
1928 -1985
हाजी वारिस अ’ली शाह के दीवाने और ना’तिया कलाम का मजमूआ’ “मुअ’त्तर मुअ’त्तर के शाइ’र