Saakhi of Wajidji Dadupanthi SHAH
स्वारथि साथी जगत सब, बिन स्वारथ नहिं कोइ।
बाजीदा बिन स्वार्थी, अपलट अबिहर सोइ।।
बाजीद दास के पास कौं, फल कहा बरनैं कोइ।
तांबै तै कंचन भयौ, पारस परसैं लोइ।।
बाबै सकरा सांनि करि, पै पानी परि देइ।
बाजीद निंहचैं नींब कौ, करवौई फर लेई।।