ख़ुदा की ज़ात और सिफ़ात के हिसाब से अपनी आदतें बनानी चाहिए।
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दिल की हिफ़ाज़त करो।
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याद रखो! खाना-पीना, सोना, मोटापा, ग़ुस्सा करना ये जानवरों की आदतें हैं और धोखा देना, फ़साद करना ये शैतानी आदतें हैं। अगर तुम इन आदतों के ग़ुलाम बनोगे, तो ख़ुदा की पहचान नहीं कर सकोगे। तुम्हें चाहिए कि इन बुरी आदतों से बाहर निकलकर फ़रिश्तों के गुण अपनाओ।
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