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Sufinama

कलाम

सूफ़ियाए किराम के लिखे हुए ज़्यादा-तर अशआर कलाम के ज़ुमरे में ही आता है और उसे महफ़िल समाव के दौरान भी गाया जाता है।

1873 -1956

शायर, संपादक और आज़ादी के संघर्ष में हिस्सा लेने वाले एक सक्रिय राजनीतिक कार्यकर्ता

1902 -1978

मा’रूफ़ शाइ’र, अदीब, मुसन्निफ़ और सूफ़ी

बोलिए